25 October 2014

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भारत के मुलनिवासी ब्राह्मण धर्म के वर्ण व्यवस्था एवं जाति व्यवस्था द्वारा हैं गुलाम

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बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ का 27 वां संयुक्त राष्ट्रीय अधिवेशन हमने 2012 में दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में किया था। उसके बाद इतना बड़ा ग्राउण्ड मालदा टाउन में जो एयरपोर्ट ग्राउण्ड है, जिसे बड़ी मुश्किल से इस राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए लिया गया है। हमें कलकाता में इतना बड़ा ग्राउण्ड नहीं मिला, क्योंकि पाँच दिन    तक आवासीय अधिवेशन करने के लिए बहुत बड़ी जमीन की जरूरत पड़ती है। दुर्गापुर में 22 एकड़ का ग्राउण्ड था, गुलबर्गा (कर्नाटक) में 25 एकड़ का ग्राउण्ड था और यह मालदा टाउन का ग्राउण्ड जो वास्तव में एयरपोर्ट की रनवे हुआ करती थी मगर  एयरपोर्ट बंद होने के कारण हमने यह ग्राउण्ड अधिवेशन के लिए लिया है यह भी लगभग 22 एकड़ जमीन है। अब तक बामसेफ संगठन का 28 राष्ट्रीय अधिवेशन हो चुका है, जो पाँच दिन का होता रहा है। किन्तु इस बार बामसेफ संगठन का 29 वां राष्ट्रीय अधिवेशन (2223 एवं 24दिसंबर) को केवल तीन दिन का होगा और (25 एवं 26 दिसंबर) दो दिन भारत मुक्ति मोर्चा का दूसरा राष्ट्रीय अधिवेशन इसी पंडाल में होगा। भारत मुक्ति मोर्चा नामक संगठन जो बामसेफ संगठन का आफसूट विंग है इसे संघर्ष व आन्दोलन करने के लिए बनाया गया संगठन है। उससे पहले आज यानि 22 दिसंबर बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ का संयुक्त राष्ट्रीय अधिवेशन का पहला दिन है। चँूकि अधिवेशन का पहला दिन है और हमलोग उद्घाटन सत्र शुरू करने जा रहे हैं। बामसेफ संगठन का 6 दिसंबर, 1978 से प्रादुर्भाव हुआ और तब से लेकर आज तक यह संगठन अपने तय उद्देश्य को पाने के लिए अपना निर्धारित कार्यक्रम लगातार 34 वर्षों से  करता आ रहा है, जो अपने-आप में काफी लंबा अर्शा हो रहा है। बामसेफ संगठन की बुनियाद मूलनिवासी समाज के कर्मचारी हैं। बामसेफ संगठन कर्मचारियों का होते हुए भी कर्मचारियों के लिए काम करनेवाला संगठन नहीं है, जबकि आम तौर पर कर्मचारियों का संगठन, कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए, पोस्टिंग के लिए, ट्रांसफर के लिए, अच्छा टेबल मिलने के लिए या ट्रांसफर रूकवाने के लिए बनाया जाता है। परन्तु बामसेफ संगठन कर्मचारियों के समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया संगठन नहीं है।बामसेफ (BAMCEF संगठन का संक्षिप्त नाम है और इसका विस्तार नाम बैकवर्ड (एससी, एसटी, ओबीसी) एण्ड माइनोरिटी कम्युनिटीज इम्पलाईज फेडरेशन है। संगठन के नाम में ही बहुत सारे रहस्य छुपे हुए हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति एवं इनसे धर्म-परिवर्तित हुए लोगों में से जो कर्मचारी और अधिकारी बने हैं, वह मूलनिवासी महापुरूषों के कठिन संघर्षों के परिणाम हैं।

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